दिवाली पूजन विधि: लक्ष्मी-गणेश पूजा की चरण-दर-चरण गाइड
11 मिनट पठन·3 नवंबर 2026
दिवाली केवल रोशनी का त्योहार नहीं — यह वह रात है जब धन-समृद्धि की देवी लक्ष्मी और विघ्नहर्ता भगवान गणेश का स्वागत घर में किया जाता है। इस रात की गई पूजा, यदि भक्ति और सही विधि से हो, तो पूरे वर्ष समृद्धि, स्वास्थ्य और सद्भाव लाती है।
लोग अक्सर सोचते हैं कि पूजा जटिल है — पर वह वास्तव में छोटे, अर्थपूर्ण कदमों का सुंदर क्रम है। यह गाइड आपको शुरू से अंत तक ले जाती है: सही समय, पूरी सामग्री, पूजा का सटीक क्रम, और जपने योग्य मंत्र — ताकि आप उसे स्वयं आत्मविश्वास से कर सकें और लगभग एक घंटे में पूर्ण कर सकें।
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1पूजा कब करें (मुहूर्त)
दिवाली रात लक्ष्मी पूजा का सर्वोत्तम समय प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद की संधि-बेला) है जो किसी शुभ नक्षत्र या अच्छी चंद्र-स्थिति से मेल खाता हो। सामान्यतः यह सूर्यास्त के 1–2 घंटे बाद आता है। अपने शहर का सटीक मुहूर्त जाँच लें, क्योंकि सूर्योदय-आधारित गणना स्थान के अनुसार बदलती है।
यदि आप ठीक मुहूर्त पर न कर सकें, तो सूर्यास्त के बाद से मध्यरात्रि से पहले का कोई भी समय चलेगा — भावना सटीक मिनट से अधिक मायने रखती है। दिवाली पर मध्यरात्रि के बाद कभी पूजा न करें, क्योंकि परंपरा उस समय को अन्य देवताओं के लिए सुरक्षित रखती है।
2क्या चाहिए (सामग्री सूची)
लक्ष्मी व गणेश की मूर्तियाँ या चित्र; आसन हेतु लाल वस्त्र; चावल (अक्षत) जिसमें थोड़ी हल्दी मिली हो; कुमकुम, हल्दी, रोली; कलश (पवित्र जल पात्र) आम के पत्ते व नारियल सहित; पूजा थाली में रखने हेतु सिक्के व नोट; मिठाई (खीर, पेड़ा, लड्डू); फल; फूल व गेंदा; पान के पत्ते व सुपारी; कपूर, अगरबत्ती, और दीयों हेतु घी; घंटी, शंख (यदि हो), और घी का दीपक।
स्थान सुबह ही तैयार करें: पूजा-कक्ष साफ करें, द्वार पर रंगोली बनाएँ, और जहाँ देवता बैठेंगे वहाँ दीवार या आसन पर कुमकुम से स्वस्तिक या 'ॐ' बनाएँ। स्वच्छ, शांत स्थान देवी को आमंत्रित करता है।
3आरंभ: गणेश अवाहन और कलश स्थापना
पूर्व या उत्तर की ओर मुख कर बैठें, दाहिने हाथ में जल व चावल लेकर संकल्प करें, और पहले भगवान गणेश का आवाहन करें: 'ॐ गण गणपतये नमः' — इसे 11 या 21 बार जपें। पूजा-स्थान के मध्य में गंगाजल (या स्वच्छ जल) से भरा कलश रखें, जिसके ऊपर नारियल व आम के पत्ते हों। यह कलश दिव्य उपस्थिति का प्रतीक है।
हर चरण में अर्पण दाहिने हाथ से करें और पहले घी का दीपक जलाएँ। घंटी बाएँ हाथ में रखें और जप करते समय धीरे-धीरे बजाते रहें, क्योंकि ध्वनि वातावरण को पवित्र करती है और ध्यान आकर्षित करती है।
4लक्ष्मी-गणेश पूजा विधि (मुख्य पूजा)
1) चम्मच से देवताओं को जल (आचमन) दें। 2) मूर्तियों पर कुमकुम व हल्दी का तिलक करें। 3) अक्षत (चावल) व पुष्प अर्पित करें। 4) षोडशोपचार पूजा करें: नैवेद्य (भोजन), दीप, धूप, पुष्प और फल सहित 16 उपचार। 5) लक्ष्मी अष्टोत्तरशतनाम (108 नाम) या यदि जानते हों तो श्री लक्ष्मी स्तोत्र पढ़ें।
6) सिक्के व नोट पूजा थाली में रखें और उन्हें अपने वित्त को आशीर्वाद देने की भावना से देवी को अर्पित करें। 7) देवताओं की छोटी आरती करें (नीचे आरती अनुभाग देखें)। 8) प्रसादित अक्षत स्वयं के सिर व कंधों पर छिड़कें, और अंत में नैवेद्य अर्पित कर प्रसाद वितरित करें।
5आरती
देवताओं के सामने जलते दीपक या कपूर की थाली को दक्षिणावर्त (घड़ी की दिशा में) गोल घुमाते हुए पारंपरिक 'ॐ जय लक्ष्मी माता' आरती गाएँ। अंत में परिवार को 'शुभ दीपावली' बोलकर सम्मान अर्पित करें। यदि पूरी आरती न आती हो, तो सरल पर प्रबल 'लक्ष्मी स्तोत्र' या 'ॐ श्रीं महा लक्ष्मीयै नमः' 11 बार कहें।
आरती के बाद दीपक जलता रहने दें और उसे स्वयं बुझने दें — यह शुभ माना जाता है। एक दीया द्वार पर और एक पूजा-कोने पर रखें ताकि देवी लक्ष्मी घर के हर भाग में आ सकें।
6पूजा के बाद: आशीर्वाद बनाए रखना
कलश व पूजा-सामग्री रात भर यथावत रखें, और प्रसादित अक्षत व कुछ सिक्के अपने धन-पात्र या अलमारी में रखें — वे पूरे वर्ष का देवी-आशीर्वाद लिए होते हैं। अगली सुबह कलश का नारियल बहते जल में विसर्जित करें या उसे प्रसाद के रूप में रसोई में रखें।
अंतिम सलाह: असली लक्ष्मी संतोष और कृतज्ञता है। जल्दबाज़ी के बिना, प्रसन्न हृदय से, और परिवार के साथ की गई पूजा आशीर्वाद को विधि के कदमों से कहीं अधिक बढ़ा देती है।
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8पूरे माह प्रतिदिन दीपक (नित्य दीप)
जो परिवार लक्ष्मी पूजा करते हैं वे अक्सर दिवाली के आसपास पूरे एक माह, विशेषकर नवरात्रि की नौ रातों, शाम को एक घी का दीया जलाते हैं। एक दीया जलाने और लक्ष्मी मंत्रों का उच्चारण करने का छोटा दैनिक कार्य मुख्य पूजा समाप्त होने के बाद भी त्योहार की ऊर्जा को बनाए रखता है।
यदि समय कम हो, तो एक स्थिर संध्या-दीप और कृतज्ञता का सच्चा क्षण, जल्दबाज़ी में की गई विस्तृत वार्षिक पूजा से अधिक प्रबल माना जाता है।
विशेष टिप
पूर्ण सामग्री-सूची से अधिक महत्वपूर्ण है शांत मन और निष्ठावान भक्ति से पूजा करना। अर्पणों के बीच हाथ साफ करने हेतु पास जल का गिलास और चावल की छोटी कटोरी रखें।
